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 ख़ामोशी भी सहयोग है,जो चाहे जनता कहके अपनी तरफ समझ ले।

तो क्या खामोश रहना ठीक समझते हो?अब मुनासिब नहीं है। खामोश रहना हाँ बुरा नहीं है मुझे क्या?
कहना, मगर जलाता है लहू चुप रहना।
क्योंकि, ख़ामोशी भी एक समर्थन हैहाँ आज काम है तो मीच लीजिये आंखें, शहर जले बस्ती फूंके या कोई मारे काटे
आज आग वहां भड़की है, कल यहां शहर जलेगा वो बैन करेंगे, मजहब खिलाएंगे आस्था को व्यापार करेंगे
सत्ता का लालच है साहब, रूह तक का भाव करेंगे सुना है सब जमीं से जज्बात सब जायज़ है बेच देना राजनीत मेंकान खोलकर मगर सुना दो,चुप्पी तोड़ो शोर मचा दो
कह दो, ख़ामोशी की भी एक मर्यादा है शोर एक दौर है हिला सकता है
एक आवाज़ से तख़्त पलट भी सकता है।

बहुत हुआ अब ना धर्म से तोड़ो यारों इश्क़ करो और इंसान को जोड़ो यारों
चलो के चल के कह दें तू हिन्दू न मुसलमान है।
चलो को चल के कह दें इकलाख  सिर्फ इंसान है।

पूजा सैनी